Southwest Zone - Vastu Dosh & Nivaran

नैऋत्य दिशा का स्वामी राहु है l यह कालपुरुष के दोनों पावों की एड़ियों एवं नितम्ब को प्रभावित करता है l यदि घर के नैऋत्य में खाली जगह है, गड्ढा है, भूतल है या कांटेदार वृक्ष हैं तो गृहस्वामी बीमार, शत्रुओं से पीड़ित एवं सम्पन्नता से दूर रहेगा l जन्मकुंडली का आठवां एवं नौवां स्थान नैऋत्य के प्रभाव में रहता है l

SOUTH WEST 213.75° TO 236.25°

ARDRA
SWATI
SHATABHISHA

Square

GOMED
गोमेद रत्न

Maa Durga

Sarpa

LEAD
सीसा

TAURAS
वृषभ

VIRGO
कन्या

Remedies With Gemstone

नैऋत्ये पुष्परागं ( Pukhraj)
रत्नों को स्वास्तिक यंत्र के नीचे स्वच्छ कर अभिमंत्रित कर फिर से पृथ्वी के अंदर रखा जाता है

Element : EARTH

Vastu Dosh

1) नैऋत्य हमेशा भारी रहना चाहिए l परन्तु यदि वहां खाली जगह है और जन्मकुंडली में राहु अकेला है तो गृहस्वामी का खजाना खाली रहेगा l
2) यदि नैऋत्य दिशा में कुआं है तो वह राहु-चंद्रमा की युति का प्रभाव है l ऐसी स्थिति में गृहस्वामी अकारण भयग्रस्त एवं मानसिक तनाव से पीड़ित रहेगा l
3) यदि नैऋत्य में रसोईघर है तो पति-पत्नी में नित्य कलह होगा l स्त्री को वायु विकार रहेगा l
4) यदि नैऋत्य में स्नानगृह है तो गृहस्वामी की कुंडली में मंगल व राहु का दुष्प्रभाव होगा l गृहस्वामी को प्रतिकूल परिस्थितियों एवं दुखों का सामना करना पड़ेगा l
5) नैऋत्य बढ़ा हुआ हो तो शत्रु, कोर्ट-कचहरी एवं ऋण-सम्बंधी कठिनाइयां उत्पन्न होंगी l
6) नैऋत्य का हर कोण पुरे घर में हर जगह संतुलित होना चाहिए, अन्यथा दुष्परिणाम भुगतना पड़ेगा l
7) दक्षिण नैऋत्य मार्ग प्रहार से घर की नारियां भयंकर व्याधियों से पीड़ित होगी l इसके साथ ही नैऋत्य में
कुआं हो तो आत्महत्या, दीर्घ रोग अथवा मृत्यु की भी संभावना होती है l
8) दक्षिण-नैऋत्य व पश्चिम-नैऋत्य में चारदीवारी अथवा द्वार हो तो अपयश, कारावास, दुर्घटना, हत्या या पक्षाघात के योग होंगे l ये द्वार शत्रु के स्थान हैं l
9) द्वार पश्चिम या दक्षिण दिशा में एक दिशामुखी होने चाहिए l यदि घर अथवा चारदीवारी में दोनों दिशाओं में द्वार ( गेट ) हो तो शत्रुता बढ़ेगी l साथ ही ऋण भार भी बढ़ सकता है l किन्तु पूर्व-उत्तर में गेट
हो तो दक्षिण-पश्चिम में भी हो सकते हैं l
10) नैऋत्य कक्ष को शयनकक्ष अथवा स्टोररूम के रूप में प्रयोग करना चाहिए, किन्तु बाथरूम या टॉयलेट में रूप में नहीं l

वास्तुदोष का निवारण

⇢ घर के पूजागृह में राहु यंत्र स्थापित करना तथा नित्यप्रति उसका पूजन करना यथेष्ट होगा l
⇢ घर के मुख्य द्वार पर भूरे या मिश्रित रंग के गणपति को प्रतिष्ठित करें l
⇢ इस सम्बंध में किसी योग्य और विद्वान वास्तुविद से परामर्श करें l